Tuesday, January 15, 2013

वन डे क्रिकेट मैच और ग्रामीण दर्शक


-अशोक मिश्र

भारत-पाकिस्तान के बीच वनडे क्रिकेट मैच चल रहा था। पाकिस्तान की टीम ढाई सौ रन बनाकर आउट हो चुकी थी। पाकिस्तान अपनी फील्डिंग सजा चुका था, तभी पवेलियन छोर से ओपनर बल्लेबाज गौतम गंभीर और वीरेंद्र सहवाग आते दिखाई दिए। गुलरिहा गांव में सत्तन पांडेय के आंगन में मैच देखने को जमा हुए लोगों ने ‘होओ...’ की आवाज करके दोनों खिलाड़ियों का स्वागत किया। इस पर सत्तन पांडेय ने युवाओं को डांटते हुए कहा, ‘तनि चुप्पै बैठो। मैचवा शुरू तौ होय देओ।’ सारे लोग चुप हो गए।
साठ वर्षीय अमेरिका तिवारी से रहा नहीं गया, ‘आई गए भारत के आल्हा-ऊदल। अब्बै देखो, चउवा-छक्का मार कै पाकिस्तानियन का धुन कै रख देइहैं।’ अमेरिका की बात सुनकर लड़के मुंह दबाकर खिखियाए, तो सत्तन पांडेय गरज उठे, ‘सभै आपन-आपन चोंच बंद रक्खो, नाहिं तो टीविया बंद कर देबौ। तब का घंटा मैचवा देखबौ।’ तभी खेल शुरू हो गया, सारे लोग शांत होकर मैच देखने लगे। पाकिस्तानी बॉलर और फील्डर भारतीय बल्लेबाजों पर कहर बरपा रहे थे। पांच ओवर तक पहुंचते-पहुंचते सिर्फ सत्रह रन ही बन पाए थे। तभी सहवाग ने मोहम्मद हफीज की बॉल को थर्ड मैन की दिशा में ढकेला और रन लेने के लिए दौड़े, गंभीर ने उन्हें रुकने का इशारा किया। राम बरन से रहा नहीं गया, ‘ई ससुरे! ठुठुर-ठुकुर करि रहे हैं पौन घंटा से। अबहीं तक कुल सतरह रन बनाय कै अपने को योद्धा समझि रहे हैं। अरे, इनसे अच्छा तौ रमेसवा कै लड़किवा खेलत है। ऊ तौ एक्कै बॉल मा सात-आठ रन बनाए बिना मनतै नाही है।’
तभी सुखमनी पांडेय बोल उठे, ‘राम बरन भइया! सठियाय गए हौ का। एक बॉल मा सात-आठ रन कैइसै बनि जाई।’ राम बरन ने ‘रन अर्थशास्त्र’ समझाया, ‘तू हमका बुड़बक समझे हो का? जौने बॉल पर वह छक्का मारत है, उस बॉल को इंपायर ‘वाइट’ बॉल बताइ देत है। होइ गवा न, सात रन...। अब एक बॉल मां का लड़िका कै जान लेबौ? ई सहबागवा और गंभीरवा से तौ अच्छा खेलत है रमेसवा कै लड़िका।’ दोनों के बात करने से सत्तन पांडेय फिर नाराज हो उठे, ‘अगर तू सबै इतनै गियानी हौ, तो काहे नाहीं चले जात हौ इंपायरी करने। हिंया काहे घास खोदत हौ। चुप्पै रहो, नाहीं तौ टीविया बंद कैइके हम चद्दर तानि कै सोइ जाब। तब बैठि कै घुंइया छीलेओ।’ तभी गंभीर ने जुनैद खान की गेंद पर चौका लगाया, स्टेडियम और सत्तन पांडेय के घर में जमा दर्शकों ने जोर की हर्ष ध्वनि की। सत्तन सहित सबका ध्यान खेल पर चला गया। मैच आगे बढ़ता रहा। सत्तर रन पर भारतीय टीम के तीन पुरोधा पवैलियन लौट चुके थे। इस बीच सत्तन पांडेय के आंगन में जमा ज्यादातर दर्शक खैनी बनाकर मुंह में दबा चुके थे।
भूखन ने कहा, ‘सुखमनी भाई! ई बताओ। ई महेंद्र सिंघवा अपने नाम के साथ धोनी काहे लगावत है?’ इस पर श्याम बोल उठा, ‘जब महेंद्र सिंघवा खेलब सुरू किहिस रहा, तबै उसने पाकिस्तानी टीम को ऐसै धोय दिहिस रहा, जैसन कउनौ धोबी कपड़ा धोवत है, तबही से वोहकर नाम धोनी पड़ि गवा रहै। ऊ साल तौ धोनिया आसटरैलिया, कनाडा, अमेरिका, रूस और इंगलैंड की टीमन का बखिया उधेड़ दिहिस रहा। बड़ा जबर खिलाड़ी है महेंद्र सिंघवा।’ तब तक मैच आगे बढ़ चुका था। एक सौ बाइस रन पर भारत के छह खिलाड़ी आउट होकर जा चुके थे। धोनी और आर. अश्विन जमे हुए थे। दोनों खिलाड़ी एक-एक रन लेकर दबाव कम करने की कोशिश कर रहे थे। सिर्फ पंद्रह ओवर ही बचे थे। एक बॉल पर धोनी ने बल्ला अड़ाया और रन लेने को दौड़े, लेकिन फिर लौट आए। सत्तन पांडेय के आंगन में बैठे ‘छोटो बिलऊ’ चीख पड़े, ‘भाग धोनिया..भाग..कम से कम एक रन तौ लैइले..।’ ‘कैइसे लैइलें...अकमलवा बिकेटवै पर ही खड़ा है। झट से चांप नहीं देगा। बिकेट कै गुल्लियै उड़ि जाई। रन लैइहैं का घंटा? अकमलवा तौ पूरा ससुर कै नाती हइ। एक्कौ मौका नाहिं छोड़त है आउट करै कै।’ तभी सुरेश रैना ने शोएब मलिक की बॉल पर चौका लगाया। उधर बिजली गुल। सबके दिल धक्क से रह गए। सत्तन पांडेय मन मसोस कर रह गए। दर्शक वापस जाने लगे। जाते-जाते भूखन ने कहा, ‘ई बिजुरी विभाग वालेन का सम्मै माता (समय माता, एक स्थानीय देवी) उठाय लइ जाय, यही बखत बिजुरी काटै का रहा। तनिक देर अऊर नहीं रुकि सकत रहै।’ सारे दर्शक उठकर अपने-अपने घर चले गए।

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